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भारतीय तीरंदाज़ी में युवा ताकत का उभार : एशियाई चैंपियनशिप में ऐतिहासिक जीत

भारतीय तीरंदाज़ी में एक नई पीढ़ी का युग शुरू होता दिख रहा है। एशियाई तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में युवा तीरंदाज़ों अंकिता भकत और धीरज बोम्मादेवरा ने ऐसे प्रदर्शन किए, जिन्होंने न केवल भारत की ताक़त को रेखांकित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारतीय तीरंदाज़ी का भविष्य अब नई प्रतिभाओं के हाथों में सुरक्षित है।

शुक्रवार को हुए मुकाबलों में अंकिता भकत ने पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता और एशिया की सबसे लगातार सफल तीरंदाज़ों में से एक, दक्षिण कोरिया की नाम सुहयोन को 7-3 से हराकर अपने करियर का सबसे बड़ा खिताब जीता। यह सिर्फ एक उलटफेर नहीं था—यह एक घोषणा थी कि भारतीय महिला रिकर्व में अब एक नया नेतृत्व उभर रहा है।

अंकिता के आत्मविश्वास का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने सेमीफाइनल में अनुभवी दीपिका कुमारी को शूट-ऑफ में आउट कर फाइनल में प्रवेश किया। बराबरी के बाद दोनों ने नौ अंक लगाए, लेकिन अंकिता का तीर केंद्र के ज़्यादा करीब था—और शायद यही वह क्षण था जिसने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी।

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फाइनल में भी उन्होंने दबाव की स्थिति में पूर्ण संयम दिखाया—पहला सेट जीता, तीसरे में पिछड़ने के बाद चौथे और पांचवें सेट में बेहतरीन वापसी करते हुए स्वर्ण अपने नाम कर लिया। पुरुष रिकर्व में भी कहानी कुछ ऐसी ही रही—नई प्रतिभा का उभार। धीरज बोम्मादेवरा ने हमवतन राहुल को 6-2 से हराकर खिताब जीता।

अनुभवी जंग चैहवान को मात देकर फाइनल में पहुंचे धीरज ने शुरुआती झटके के बाद शानदार लय पकड़ी और लगातार तीन सेट जीतकर अपने दमखम का सबूत दिया।

इस चैंपियनशिप में भारत ने कुल 10 पदक—छह स्वर्ण, तीन रजत और एक कांस्य—जीतकर तालिका में शीर्ष स्थान पर कब्जा किया। यह भारतीय तीरंदाज़ी के लिए सिर्फ एक सफल मुहिम नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि अब युवा तीरंदाज़ अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेतृत्व संभालने को तैयार हैं।

संगीता द्वारा कांस्य पदक जीतने, और दीपिका कुमारी जैसी दिग्गज को मात देने ने इस बदलाव को और स्पष्ट कर दिया। भारतीय तीरंदाज़ी एक संक्रमणकाल से गुजर रही है—जहाँ अनुभवी खिलाड़ियों की विरासत और युवा खिलाड़ियों की नई ऊर्जा मिलकर एक मजबूत टीम तैयार कर रही है।

इस प्रदर्शन ने साबित कर दिया कि आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज़ी में भारत की नई पहचान—युवा, निडर और लगातार बेहतर होती प्रतिभा—होगी।

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