भारत-अमेरिका संबंधों में नया मील का पत्थर
अमेरिका ने लॉन्च किया 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) वीजा टूल, भारतीय पेशेवरों को मिलेगा बड़ा लाभ

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से अमेरिकी प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) विजन के तहत एक नया और विशेष ‘वीजा टूल’ (Visa Tool) लॉन्च किया गया है। यह नई वीजा नीति विशेष रूप से भारत जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदार देशों के कुशल पेशेवरों और निवेशकों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचाएगी।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT), व्यापार और कूटनीति के क्षेत्र में भारत अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और बड़ा साझीदार बनकर उभरा है। वर्षों से भारतीय आईटी पेशेवरों, वैज्ञानिकों और व्यापारियों को अमेरिकी वीजा हासिल करने में लंबी प्रतीक्षा सूची (Waiting Period) और जटिल नियमों का सामना करना पड़ रहा था। इस भारी समस्या के समाधान और द्विपक्षीय व्यापार को निर्बाध बनाने के लिए, अमेरिकी प्रशासन ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ वीजा नीति की आधिकारिक घोषणा की है।
क्या है ‘अमेरिका फर्स्ट’ वीजा टूल?
नाम से भले ही यह नीति संरक्षणवादी (Protectionist) लगे, लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य अमेरिका के उन उद्योगों को गति देना है, जिन्हें उच्च-कौशल (High-Skilled) वाले विदेशी प्रतिभाओं की तत्काल आवश्यकता है। नए ‘वीजा टूल’ के तहत एक विशेष ‘फास्ट-ट्रैक’ (Fast-Track) प्रणाली विकसित की गई है। इस प्रणाली का उपयोग करके भारत के शीर्ष आईटी पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, रिसर्चर और बड़े निवेशक अब महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में अपना एच-1बी (H-1B) या व्यापारिक वीजा (B1/B2) प्राप्त कर सकेंगे।
भारत को ही क्यों दी गई प्राथमिकता?
अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अनुसार, अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर स्पेस और उन्नत तकनीक (AI, सेमीकंडक्टर) के विकास में भारतीय प्रतिभाओं का अमूल्य योगदान है। चीन के साथ चल रहे तकनीकी युद्ध (Tech War) के बीच अमेरिका अब ‘चाइना प्लस वन’ नीति पर चल रहा है। ‘अमेरिका फर्स्ट’ के लिए जरूरी है कि अमेरिका में बेहतरीन टैलेंट आए, और वर्तमान में भारत से बेहतर टैलेंट पूल दुनिया में कहीं नहीं है। इसलिए इस टूल में भारत को ‘प्राथमिक रणनीतिक भागीदार’ (Primary Strategic Partner) का दर्जा दिया गया है।
व्यापार और निवेश में आएगी तेजी
इस नई वीजा नीति से दोनों देशों के बीच व्यापारिक निवेश में भी भारी उछाल आने की उम्मीद है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और नैसकॉम (NASSCOM) ने अमेरिकी सरकार के इस कदम का भारी स्वागत किया है। अब भारतीय कंपनियों के सीईओ (CEO) और स्टार्टअप फाउंडर्स को अपने अमेरिकी ऑपरेशंस संभालने के लिए वीजा में देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह नीति साबित करती है कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ का रास्ता भारत की प्रतिभा और भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी से होकर ही गुजरता है।



