यूक्रेन युद्ध का खौफनाक सच
रूसी सेना में शामिल हुए थे 217 भारतीय, 49 युवाओं ने गंवाई जान, केंद्र का सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे विनाशकारी युद्ध के मोर्चे से भारत के लिए एक बेहद हृदयविदारक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में एक आधिकारिक हलफनामा (Affidavit) दाखिल कर स्वीकार किया है कि रोजगार के धोखे में आकर 217 भारतीय युवा रूसी सेना में शामिल हो गए थे। सबसे दुखद बात यह है कि इस भयंकर युद्ध में अब तक 49 भारतीय नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
युद्ध किसी भी देश का हो, लेकिन उसकी सबसे बड़ी कीमत अक्सर निर्दोष और मजबूर लोगों को चुकानी पड़ती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के खौफनाक मोर्चे पर भारतीय युवाओं की मौजूदगी और उनकी मौतों को लेकर दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चौंकाने वाले आधिकारिक आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। सरकार के इस हलफनामे ने मानव तस्करी और फर्जी रोजगार एजेंटों के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट की पोल खोल दी है।
फर्जी एजेंटों का शिकार बने 217 भारतीय
सरकार द्वारा न्यायालय में दी गई जानकारी के अनुसार, कुल 217 भारतीय नागरिक रूसी सेना के साथ अनुबंध (Contract) पर काम कर रहे थे। इन युवाओं को सेना में लड़ने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा गार्ड, कुक, या आर्मी हेल्पर (सहायक) जैसी ‘सुरक्षित’ नौकरियों का लालच देकर रूस ले जाया गया था। मानव तस्करों और फर्जी एजेंटों ने इन बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये वसूले। लेकिन रूस पहुंचने के बाद, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और उन्हें कुछ दिनों की मामूली सैन्य ट्रेनिंग देकर जबरन युद्ध के सबसे खतरनाक मोर्चों (Frontlines) पर लड़ने के लिए भेज दिया गया।
49 युवाओं की दुखद मृत्यु और परिवारों का दर्द
हलफनामे का सबसे दर्दनाक हिस्सा मौतों का आंकड़ा है। केंद्र सरकार ने पुष्टि की है कि युद्ध क्षेत्र (War Zone) में गोलाबारी और ड्रोन हमलों की चपेट में आने से 49 भारतीय युवाओं की दुखद मृत्यु हो गई है। इनमें से अधिकांश युवा पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और केरल के रहने वाले थे। सरकार ने बताया कि इनमें से कई शवों को कूटनीतिक प्रयासों के जरिए भारत वापस लाकर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है, जबकि कुछ शवों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया अभी भी चल रही है।
सरकार के बचाव और कूटनीतिक प्रयास
सर्वोच्च न्यायालय ने जब सरकार से फंसे हुए बाकी भारतीयों की वापसी को लेकर सवाल किए, तो विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया कि भारत सरकार रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार कूटनीतिक संपर्क में है। सरकार के भारी दबाव के कारण, रूसी रक्षा मंत्रालय ने बचे हुए भारतीय नागरिकों के सैन्य अनुबंधों (Contracts) को समय से पहले रद्द करने और उन्हें सुरक्षित भारत वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मानव तस्करों पर कसा जा रहा है शिकंजा
इस हलफनामे ने देश में बेरोजगारी का फायदा उठाने वाले फर्जी ट्रैवल और प्लेसमेंट एजेंसियों के काले कारनामों को उजागर किया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देश भर में ऐसे कई एजेंटों के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी की है और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है। यह त्रासदी देश के युवाओं के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे विदेशों में नौकरी के आकर्षक लेकिन संदिग्ध विज्ञापनों के झांसे में न आएं, क्योंकि यह उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।



