रक्षा क्षेत्र में भारत की अजेय उड़ान
रक्षा मंत्री का दावा, 25-30 वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बनेगा देश

भारत अब केवल हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से हथियारों के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में उभर रहा है। रक्षा मंत्री ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए दावा किया है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में जिस अभूतपूर्व तेजी से काम हो रहा है, उसके बल पर अगले 25 से 30 वर्षों के भीतर भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन जाएगा।
दशकों तक अपनी सैन्य आवश्यकताओं के लिए विदेशी ताकतों और आयातों पर निर्भर रहने वाला भारत अब रक्षा विनिर्माण (Defense Manufacturing) के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है। रक्षा मंत्री ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए देश की सामरिक क्षमताओं और भविष्य की योजनाओं पर एक अत्यंत महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है।
स्वदेशी उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले एक दशक में भारत की रक्षा उत्पादन नीति में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) पहल के तहत, सरकार ने सैकड़ों विदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध (Negative Import List) लगा दिया है, जिससे घरेलू रक्षा उद्योगों को संजीवनी मिली है। आज भारत में तेजस लड़ाकू विमान, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, अर्जुन टैंक, उन्नत रडार और अत्याधुनिक ड्रोन का स्वदेशी स्तर पर भारी उत्पादन हो रहा है।
निर्यात के मोर्चे पर शानदार सफलता
आंकड़ों का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत का रक्षा निर्यात पिछले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ गया है। आज भारत दुनिया के 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण बेच रहा है। हाल ही में फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की सफल डिलीवरी और आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम का निर्यात इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि दुनिया अब भारतीय सैन्य तकनीक का लोहा मान रही है।
अगले 25-30 वर्षों का ‘रोडमैप’
भविष्य का खाका खींचते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “हमारी नीतियां स्पष्ट हैं और हमारे वैज्ञानिकों की क्षमता असीमित है। निजी क्षेत्र (Private Sector) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के संयुक्त प्रयासों से, मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अगले 25 से 30 वर्षों में भारत हथियारों और रक्षा प्रणालियों का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक (Exporter) बन जाएगा।”
आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव
यह लक्ष्य केवल सैन्य दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और कूटनीतिक मायने भी हैं। जब भारत हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक बनेगा, तो देश में लाखों उच्च-कुशल रोजगार पैदा होंगे और विदेशी मुद्रा भंडार में भारी वृद्धि होगी। साथ ही, वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) में भारत का दबदबा और प्रभाव कई गुना बढ़ जाएगा, क्योंकि रक्षा कूटनीति आधुनिक युग में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने का सबसे बड़ा हथियार है।



