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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी को मिली पूर्वांचल के व्यंजनों की पहचान कर सुझाव देने की जिम्मेदारी

सरिता त्रिपाठी: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम और निर्यात प्रोत्साहन विभाग द्वारा, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के विस्तार के रूप में, प्रारंभ की गई वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ODOC) पहल के अंतर्गत नॉलेज पार्टनर के रूप में नामित किया गया है।

दिव्या रानी सिंह प्रोग्राम की नोडल अफसर बनीं:

ODOP सेल, कानपुर द्वारा जारी पत्र के अनुसार विश्वविद्यालय को गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर एवं महाराजगंज जनपदों के पारंपरिक व्यंजनों और खाद्य उत्पादों की पहचान, मूल्यांकन एवं अनुशंसा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। विश्वविद्यालय की गृह विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो दिव्या रानी सिंह को इस प्रोग्राम का नोडल ऑफिसर नामित किया गया है।

लोकल स्वाद और पारंपरिक कौशल को वैश्विक मंच:

यूनिवर्सिटी के जनसंपर्क अधिकारी प्रोफेसर महेंद्र सिंह ने कहा कि ODOC पहल के अंतर्गत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा प्रत्येक चयनित जनपद से कम से कम दो पारंपरिक व्यंजनों/खाद्य उत्पादों की पहचान, उनके गुणवत्ता संवर्धन, खाद्य सुरक्षा, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं स्केलेबिलिटी का वैज्ञानिक मूल्यांकन, और जिला-वार संक्षिप्त सुझाव रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत हुई:

इस योजना के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ODOP और ODOC जैसी योजनाएं उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय स्वाद और पारंपरिक कौशल को वैश्विक मंच प्रदान करने का सशक्त माध्यम हैं।

 

पारंपरिक व्यंजनों से रोजगार के नए अवसर:

सीएम योगी ने कहा कि पारंपरिक व्यंजनों को गुणवत्ता, ब्रांडिंग और बाज़ार से जोड़कर स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं। विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की सहभागिता से ऐसी योजनाएं प्रमाण-आधारित, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक स्वरूप प्राप्त करती हैं।इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।

विकास शोध, गुणवत्ता आवश्यकता के अनुरूप हों:

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ODOP योजना ने उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में नई पहचान दी है। ODOC पहल के अंतर्गत डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय की सहभागिता यह सुनिश्चित करेगी कि पूर्वांचल के पारंपरिक व्यंजनों का चयन और विकास शोध, गुणवत्ता एवं बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन और आजीविका को सशक्त बनाएगी।

 

रोजगार का सशक्त माध्यम बनेगा:

पूनम टंडन ने कहा कि यह सहभागिता राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें उच्च शिक्षा संस्थानों को समाज, उद्योग और स्थानीय समुदायों से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है।

ODOP–ODOC कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक व्यंजन केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित न रहकर पर्यटन, उद्यमिता और रोजगार के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित होंगे, जिससे पूर्वांचल के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

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