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सुरेश कलमाड़ी का निधन : भारतीय खेल प्रशासन के एक युग का अंत

भारतीय खेल जगत में मंगलवार तड़के एक लंबे और प्रभावशाली अध्याय का अंत हो गया, जब भारतीय ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ खेल प्रशासक सुरेश कलमाड़ी का पुणे के एक अस्पताल में निधन हो गया।

81 वर्ष की आयु में उनका जाना न केवल एक व्यक्ति की विदाई है, बल्कि देश के खेल प्रशासन के उस दौर का भी अंत है, जिसमें उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक निर्णायक भूमिका निभाई।

लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे कलमाड़ी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बहू, दो विवाहित बेटियां और उनके दामाद, साथ ही पोते-पोतियां शामिल हैं।

1944 में जन्मे सुरेश कलमाड़ी का जीवन केवल खेल प्रशासन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत भारतीय वायु सेना में एक लड़ाकू पायलट के रूप में की और 1965 तथा 1971 के युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई।

साभार : गूगल

इसके बाद उन्होंने राजनीति और खेल प्रशासन के क्षेत्र में कदम रखा, जहां उनकी पहचान एक प्रभावशाली और लंबे समय तक सक्रिय नेता के रूप में बनी। कांग्रेस नेता के तौर पर उन्होंने कई बार पुणे का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया और केंद्रीय मंत्री के रूप में भी सेवाएं दीं।

साथ ही, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने नीतिगत और संगठनात्मक स्तर पर अपनी छाप छोड़ी। खेल प्रशासन में उनका सबसे लंबा और प्रभावशाली कार्यकाल भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष के रूप में रहा।

1996 से 2011 तक आईओए का नेतृत्व करते हुए वे देश की सर्वोच्च खेल संस्था के सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले व्यक्तियों में शामिल हो गए। यह वह दौर था जब भारतीय खेल वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे और उस समय कलमाड़ी का प्रभाव काफी व्यापक था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पकड़ मजबूत रही। उन्होंने एशियाई एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और विश्व एथलेटिक्स की सर्वोच्च संस्था, तत्कालीन आईएएएफ, की परिषद के सदस्य भी रहे।

इन भूमिकाओं के चलते उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के सबसे शक्तिशाली खेल प्रशासकों में गिना जाता था।  उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय खेल ने कुछ ऐतिहासिक क्षण भी देखे।

2008 के बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाज अभिनव बिंद्रा द्वारा जीता गया भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक उसी दौर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा।

दिल्ली में 2010 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भी कलमाड़ी की भूमिका केंद्रीय रही। वह इन खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष थे और आयोजन की पूरी प्रक्रिया में उनकी अहम भागीदारी रही।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ उन्होंने स्थानीय खेल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया। पुणे में एथलेटिक्स और खेल अवसंरचना के विस्तार में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्हीं के प्रयासों से पुणे अंतरराष्ट्रीय मैराथन की शुरुआत हुई, जो आगे चलकर भारतीय एथलेटिक्स कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।

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