जीवन में बदलाव, बोर्ड पर वही बादशाहत : कार्लसन फिर खिताबी मिशन पर
शतरंज के दिग्गज मैग्नस कार्लसन ने साफ कर दिया है कि निजी जीवन में आए बड़े बदलावों का उनके प्रतिस्पर्धी जज़्बे पर कोई असर नहीं पड़ा है। शुक्रवार से शुरू हो रही फिडे विश्व रैपिड और ब्लिट्ज चैंपियनशिप से पहले उन्होंने कहा कि वह यहां केवल एक ही लक्ष्य लेकर पहुंचे हैं—खिताब जीतने के लिए।
कार्लसन इस साल भी शतरंज की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम रखने में सफल रहे हैं और सत्र की आखिरी इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में वह एक बार फिर प्रबल दावेदार के रूप में शुरुआत करेंगे। उनके नाम अब तक पांच रैपिड और आठ ब्लिट्ज विश्व खिताब दर्ज हैं, जो उनकी निरंतर सफलता को दर्शाता है।
नॉर्वे के स्टार खिलाड़ी ने क्लासिकल विश्व चैंपियन भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश के साथ मंच साझा करते हुए निजी जीवन पर भी बात की। उन्होंने कहा, “पति और पिता होना एक शानदार एहसास है। यह साल मेरे लिए बेहतरीन अनुभवों से भरा रहा है।
जहां तक शतरंज की बात है, तो न मेरा बेटा और न ही मेरी पत्नी इसमें मेरी खास मदद कर पाते हैं। इसलिए पिता बनने के बाद ज्यादा कुछ नहीं बदला है। मैं पहले की तरह ही जीतने के इरादे से आया हूं।”

दिलचस्प बात यह है कि गुकेश को कार्लसन के संभावित भावी प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जा रहा है। इसी साल नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में गुकेश ने कार्लसन को हराकर बड़ा उलटफेर किया था, जिससे शतरंज जगत में खासी चर्चा हुई।
जब कार्लसन से पूछा गया कि क्या वह अब भी गुकेश को “युवा खिलाड़ी” मानते हैं, तो उन्होंने अपने खास अंदाज़ में जवाब दिया, “मुझे लगता है कि जब उनका जन्म हुआ था, तब मैं कम से कम दुनिया के शीर्ष 50 खिलाड़ियों में शामिल था। इसलिए मेरा जवाब हां है।”
युवा खिलाड़ियों को लेकर कार्लसन का नजरिया भी उतना ही स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि नए और युवा प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलना हमेशा रोमांचक होता है।
“स्थापित शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबले रोमांचक तो होते हैं, लेकिन उनमें एक जाना-पहचाना एहसास भी रहता है। जबकि युवा खिलाड़ियों के खिलाफ, खासकर जब कुछ महीनों से सामना न हुआ हो, तो यह अंदाजा लगाना मुश्किल होता है कि वे कितनी बड़ी चुनौती पेश करेंगे।”
इस तरह, अनुभव, उपलब्धियों और अडिग जीत की भूख के साथ मैग्नस कार्लसन एक बार फिर साबित करने उतर रहे हैं कि निजी जीवन में नए अध्याय जुड़ने के बावजूद शतरंज के बोर्ड पर उनका फोकस और प्रभुत्व अब भी वैसा ही है।



