राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शांति विधेयक को मंजूरी दी , जानिए क्या है शांति विधेयक

राघवेन्द्र प्रताप सिंह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के शीतकालीन सत्र में पारित सतत परमाणु ऊर्जा उपयोग और विकास, भारत रूपांतरण विधेयक, 2025 – शांति विधेयक को स्वीकृति दे दी है। राष्ट्रपति ने कल इस विधेयक को मंज़ूरी दी। भारतीय संसद के दोनों सदनों ने 17 और 18 दिसंबर को एक नए विधेयक को मंज़ूरी दी थी। इसका मक़सद है अब तक सख़्ती से नियंत्रित देश के नागरिक परमाणु क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलना। सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ़ न्यूक्लिटर एनर्जी फ़ॉर ट्रांस्फ़ॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक को 17 दिसंबर को लोकसभा में जब पास किया गया, तब विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया था। इसके बाद 18 दिसंबर को राज्यसभा ने भी विधेयक को पास कर दिया। राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिलने के बाद यह विधेयक क़ानून बन गया है।
इस विधेयक में नागरिक परमाणु क्षेत्र से जुड़े सभी कानूनों को समाहित किया गया है। साथ ही इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी का भी प्रावधान किया गया है। विधेयक के तहत परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त कर दिया गया है, जिन्हें भारत में नागरिक परमाणु क्षेत्र के विकास में बाधक माना जा रहा था। सरकार का कहना है कि यह नया क़ानून भारत को 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगा। फ़िलहाल, भारत में कुल बिजली उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी सिर्फ़ 3% है।
भारत के परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है , “नया क़ानून मौजूदा परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और परमाणु क्षति के लिए नागरिक दायित्व अधिनियम, 2010 (CLNDA), को हटाकर उनकी जगह एक “एकीकृत, व्यापक क़ानून लाएगा, जो भारत की मौजूदा और भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों के हिसाब से बनाया गया है। भारत की भूमिका भू-राजनीति में बढ़ रही है। अगर हमें वैश्विक खिलाड़ी बनना है तो हमें वैश्विक मानकों और रणनीतियों का पालन करना होगा। दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है। भारत ने भी 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। नए क़ानून के तहत कुछ परमाणु गतिविधियों में 49% तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति होगी।
शांति बिल भारत के परमाणु क्षेत्र में कई तरह के बदलावों को लेकर पेश किया गया। सरकार की तरफ से बताया गया कि इसके विधेयक बनने के बाद निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र का रास्ता खुल जाएगा, वहीं सरकार का एकाधिकार खत्म होगा। यानी परमाणु क्षेत्र में अब प्राइवेट प्लेयर्स को भी लाने की तैयारी हो रही है। इस बिल के पास होने पर पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि ये हमारे टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाला पल है। AI को सुरक्षित रूप से ताकत देने से लेकर ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने तक, यह देश और दुनिया के लिए स्वच्छ ऊर्जा वाले फ्यूचर को बढ़ावा देने का काम करेगा।



