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अंतिम गेंद तक लड़ाई: 2017 की टीस से 2025 का ताज तक दीप्ति शर्मा की कहानी

मंजिल के काफी करीब आकर उसे छू न पाने का दर्द क्या होता है, यह एहसास दीप्ति शर्मा ने 2017 में ही कर लिया था। उस साल महिला विश्व कप का फाइनल भारत के हाथ से फिसल गया था।

इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए उस मुकाबले में दीप्ति शर्मा भी टीम का हिस्सा थीं, लेकिन फाइनल उनके लिए यादगार नहीं रहा—न गेंद से कोई विकेट मिला और न ही बल्ले से बड़ी पारी, सिर्फ 14 रन ही बन पाए। भारतीय टीम के साथ-साथ दीप्ति के लिए भी वह हार एक गहरी टीस छोड़ गई थी।

लेकिन खेल सिर्फ हार की कहानी नहीं लिखता, वह वापसी का रास्ता भी दिखाता है। ठीक आठ साल बाद, 2025 में, वही भारतीय महिला टीम इतिहास रचती है।

पहली बार वर्ल्ड कप भारत के नाम होता है और इस ऐतिहासिक जीत की सबसे चमकदार कड़ी बनकर उभरती हैं दीप्ति शर्मा। टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।

इस जीत के पीछे क्या सोच थी, क्या तैयारी थी—इस पर दीप्ति शर्मा ने एक हालिया इंटरव्यू में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि टीम ने शुरुआत से ही एक मंत्र तय कर लिया था—“आखिरी गेंद तक लड़ना है।”

दीप्ति के शब्दों में, “हमने सुनिश्चित किया कि हमारी कड़ी मेहनत जाया न जाए। हमारा हमेशा से एक ही लक्ष्य था—कप जीतना। यह बहुत समय बाद आया। यह लिखा गया था कि यह भारत में होगा। हमने बस एक-दूसरे को सपोर्ट किया।”

2025 के महिला विश्व कप को याद करते हुए उन्होंने कहा कि टीम ने कभी हार नहीं मानी। हर मैच से सीख ली गई। उन्होंने 2017 के फाइनल का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही उस दिन जीत नहीं मिली, लेकिन उससे बहुत कुछ सीखने को मिला।

दबाव में कैसे खेलना है, एक टीम के तौर पर कैसे खड़ा रहना है, कहां कमी रह जाती है और आगे कितनी मेहनत करनी है—इन सभी सवालों के जवाब उसी हार से मिले।

“हमने खुद से कहा कि हमें सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक बनना है। हमने इस बात पर फोकस किया कि एक टीम के तौर पर हमें क्या हासिल करना है। हमारे दिमाग में हमेशा यही था कि आखिरी गेंद तक लड़ना है,” दीप्ति ने कहा।

विश्व कप जीत के बाद दीप्ति शर्मा की जिंदगी में आए बदलाव भी कम दिलचस्प नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अब लोग उन्हें हर जगह पहचानने लगे हैं। जहां भी जाती हैं, प्रशंसक सेल्फी लेने के लिए घेर लेते हैं।

उन्होंने मुंबई का एक हालिया किस्सा साझा किया। दीप्ति ने बताया कि वह मास्क पहनकर चाय और वडा पाव लेने निकली थीं, लेकिन दुकानदार ने फिर भी उन्हें पहचान लिया। जब उन्होंने पैसे देने चाहे तो दुकानदार ने लेने से इनकार कर दिया। उसका कहना था कि चाय और खाना उनकी तरफ से गिफ्ट है।

दीप्ति जब पैसे देने पर अड़ी रहीं, तो दुकानदार ने कहा, “आप देश के लिए अच्छा कर रही हैं। आपने हाल ही में वर्ल्ड कप जीता है। हम आपका पैसा नहीं चाहते।”

2017 की हार से मिली सीख, आठ साल की मेहनत और “आखिरी गेंद तक लड़ने” के जज्बे ने आखिरकार दीप्ति शर्मा और भारतीय महिला क्रिकेट टीम को उस मुकाम पर पहुंचा दिया, जहां अधूरी कहानी पूरी हो गई।

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