417 रन का पीछा — भारत ‘ए’ के लिए सबक, अफ्रीकी बल्लेबाजों की क्लास दिखी
भारत ‘ए’ के लिए रविवार का दिन सख्त सबक लेकर आया। दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ के बल्लेबाजों ने अपनी दृढ़ता और क्लासिक तकनीक के दम पर 417 रनों का असंभव-सा लक्ष्य तीन ओवर शेष रहते ही हासिल कर लिया — और वह भी भारत ‘ए’ के नियमित टेस्ट गेंदबाजों के सामने।
यह न केवल ‘ए’ क्रिकेट में लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे बड़ा स्कोर रहा, बल्कि भारतीय गेंदबाजों की तैयारी पर भी सवाल खड़े कर गया। दिन की शुरुआत में 25 रन पर बिना विकेट गिराने के बाद जॉर्डन हरमन (91) और लेसेगो सेनोक्वाने (77) ने 156 रनों की साझेदारी कर मैच का रुख बदल दिया।
दोनों ने नई गेंद के सामने धैर्य और आत्मविश्वास दिखाते हुए भारतीय तेज़ गेंदबाजों — मोहम्मद सिराज, आकाशदीप और प्रसिद्ध कृष्णा — को बेअसर कर दिया। भारी रोलर से सपाट हुई पिच ने बल्लेबाजों का काम आसान किया, लेकिन हरमन के ड्राइव और सेनोक्वाने के धैर्य ने साबित किया कि यह जीत केवल परिस्थितियों की नहीं, मानसिक दृढ़ता की भी थी।

मध्यक्रम में तेम्बा बावुमा (59) और जुबैर हमजा (77) ने अनुभवी बल्लेबाजी का नमूना पेश किया, जबकि कॉनर एस्टरहुइजन (नाबाद 52) और तियान वान वुरेन (नाबाद 20) ने अंत में तेजी से रन बटोरकर जीत सुनिश्चित की। भारत ‘ए’ से सिराज, कृष्णा और कुलदीप यादव ने प्रयास तो किए, लेकिन विकेट निकालने में सफलता नहीं मिली।
यह हार टीम प्रबंधन के लिए चेतावनी है कि विश्व टेस्ट चैंपियन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आने वाली श्रृंखला में केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि संयम और योजनाबद्ध गेंदबाजी ही जीत का रास्ता दिखाएगी।
हार के बीच कुछ सकारात्मक झलकियां भी रहीं — ऋषभ पंत का चोट के बाद मैदान पर लौटना और ध्रुव जुरेल की दोनों पारियों में शतकीय बल्लेबाजी भारतीय टीम के लिए सुकून देने वाली रहीं।
इस मैच ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत ‘ए’ को विदेशी परिस्थितियों में जीत दर्ज करने के लिए अपनी गेंदबाजी रणनीति पर दोबारा काम करना होगा। दक्षिण अफ्रीका ‘ए’ ने जिस सहजता से रन बनाए, वह बताता है कि आने वाले टेस्ट मुकाबले भारत के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होंगे।



